Part K- Mahrishi Ved Vyas


स्वर्ग में अद्रिका नाम की एक अप्सरा थी
किसी कारण से उसे श्राप मिला कि वह मछली का जन्म लेगी ,सत्यवती इसी मछली के उदर से उत्त्पन्न हुई थी ,एक बार निषादो की बस्ती में कुछ मछुआरों को एक विशेष मछली यमुना में मिली जिसके पेट से एक बालक और एक बालिका प्राप्त हुई ,बालक को तो निषादराज ने अपने पास रख लिया और कन्या को नदी पर नाव  चलाने का काम दे दिया ,एक बार एक ऋषि{पराशर} नदी के उस पार जाना चाहते थे तो सत्यबती  ऋषि पराशर को नाव् में बिठाकर उस पार ले चली ,रास्ते में  देखा कि सरस्वती बहुत सुँदर  मालूम पड़ती थी किसी दिव्य स्त्री की तरह किन्तु सत्यवती के शरीर से मछली की दुर्गन्ध आ रही थी इस दुर्गन्ध के कारण सत्यवती को मत्स्यगन्धा कहा जाता था  ,ऋषि पराशर ने सत्यबती से समागम करने का प्रस्ताव दिया किन्तु सत्यवती ऐसा करने से मना कर दिया कि उसे किसी और से विवाह करना है , तब ऋषि ने कहा कि  तुम्हारा कौमार्य भंग नहीं होगा और तुम कुमारी ही रहोगी ,पराशर ने सत्यवती के शरीर से मछली की गंध नष्ट कर दी अब सत्यबती के शरीर से सुगंध आने लगी तब से सत्यवती का  नाम सुगंधा हो गया  ,ऋषि पाराषर और सत्यवती से जिस पुत्र का जन्म हुआ वह व्यास कहलाया ,वेद व्यास अत्यंत ज्ञानी और वेद सहिंता आदि के रचियता हुए ,हम जो कहानी सुना रहे हे वह इन्ही वेद व्यास की है जो महाभारत या जय सहिंता से है ,तो फिर वेद व्यास की कुछ कहानी और सृष्ठि निर्माण की कहानी सुनते है
कृमशः 

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