Part I-Vasu & Vashishth

 जब गंगा शांतुन को छोड़कर स्वर्ग जाने लगी
तब राजा शांतुन ने गंगा से पुछा की आप स्वर्ग क्यों जा रही है गंगा ने कहा  की राजन मुझे स्वर्ग में देवता भी स्मरण करते है और में देवताओ के कार्यो में सहयोग करती हूँ ,इन आठ वसुओं को स्वर्ग में श्राप मिला था की वे पृथ्वी लोक पर जन्म ले यह श्राप वरुण के पुत्र  वशिष्ट मुनि जो मेरु पर्वत पर रहते थे  ने दिया था,एक बार  पृथु नामक वसु वशिष्ठ के आश्रम पर पत्नी सहित आया ,वशिष्ठ के पास एक गाय थी ,उस गाय का नाम नंदनी था ,नंदनी गाय कामधेनु से यज्ञ आदि की सामग्री लेकर वशिष्ठ को देती थी,पृथु की पत्नी ने पृथु से कहा की आप इस गाय को ले ले ,वसु ने अन्य आठ वसुओं से सलाह कर नंदनी को चुरा लिया नंदनी गाय को धौ नमक वसु ने  चुराया ,जब वशिष्ठ वापस अपने आश्रम पर आये तो देखा की नंदनी नहीं हे ,उन्होंने ध्यान से देखा और पता कर लिया कि  गाय को धौ ने चुराया हे तब वशिष्ठ ने धो और उसके साथी सात भाइयो को श्राप दिया की तुम आठ लोग पृथ्वी पर जन्म लोगे जिसमे धो पृथ्वी पर अधिक समय तक रहेगा और इसके  कोई पुत्र नहीं होगा यही भीष्म बना और शेष सात वसु गंगा के पुत्र तो बने पर जन्म लेते ही जल में डाल दिए गए ,राजा शांतुन का विवाह गंगा से हुआ था अब आप सत्यबती की कहानी सुने की कैसे सत्यबती का विवाह राजा शांतुन से हुआ। 
क्रमशः 

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