Part G Dushayant & Ganga

गंगा जहानह्वी  की पुत्री थी ,स्वर्ग में देवता भी गंगा का स्मरण करते थे, परन्तु एक दिन इच्छाकु वंस के राजा महाभिष स्वर्ग में देवताओ के साथ एक यज्ञ कर रहे थे तब वायु देवता ने गंगा के अंग से स्वेत वस्त्र उडाने की कोशिश की तब सभी देवताओ ने अपनी आंखे नीची कर ली,किन्यु महाभिष देखते ही रहे तब  ब्रह्मा जी ने महाभिष को श्राप दिया की अब तुम पृथ्वी लोक में ही जाओ और गंगा तुम्हारा अहित करेंगी। जब गंगा इस श्राप को पूरा करने के लिए पृथ्वी पर अवतरति हुई तो आठ वसु भी गंगा को रस्ते में मिल गए और गंगा के साथ साथ चलने लगे गंगा ने पुछा की वसुओं तुम मेरे साथ क्यों चल रहे हो?वसुओ ने कहा की हमें वशिष्ट ने श्राप दिया है । हम आपके पुत्र बनेंगे। गंगा ने स्वीकार किया की हम तुम्हे अपने  पुत्र के रूप में जन्म देकर शीघृ  ही तुम्हे मुक्त कर देंगे इस पर वसुओं ने कहा कि  हम अपने एक एक अंश से एक पुत्र को पृथ्वी पर ही छोड़ देंगे और वह आजीवन निःसंतान रहेगा जो भीष्म के नाम से प्रसिद्ध होगा।
क्रमश :

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